Saturday, April 3, 2010

फर्क

डगर डगर

टहर टहर

शहर शहर

पहर पहर

मगर अगर

करे है फर्क

यू ही बीत रही जिन्दगी

भूल के लक्ष्य

भटक रही जिन्दगी

समझ ना आई बात

लुट गयी जिन्दगी

डगर डगर

टहर टहर

शहर शहर

पहर पहर

घूम रही जिन्दगी

No comments:

Post a Comment